दिन ढलते ही
जब बैठता हूँ
पच्छिम की खिड़की
को खोल कर।
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कहते हैं सभी
और
जानते भी है
कि सूर्यास्त देखना
मेरा पसंदीदा शग़ल है।
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वो नहीं जानते
मैं आज भी खिड़की
के दूसरी तरफ सिर्फ
तुम्हे ही देखता हूँ
धीरे-धीरे दूर जाते।
अपर्णा शर्मा Sept.18th,2026
