बता! जिंदगी तू और बता

पतझड़ सा तू खूब सताती रही
कभी सदाबहार सी खिलती रही।


बसंत की मीठी सुगंध महक रही
कभी पतझड़ की उदासी छाई रही
तेरे इन अंदाज पर मैं कहती रही
बता!जिंदगी तू और बता।
https://ae-pal.com/
तू शरारतें कर शोखियाँ दिखाती रही
कभी बुलबुला बन कर बिखरती रही।

ठोकरों में तू हमेशा संभालती रही
कभी मंजिल देकर, तू छीनती रही
तेरे इस व्यापार पर मैं कहती रही
बता!जिंदगी तू और बता।
https://ae-pal.com/
तू अपने इशारों पर नचाती रही
रुला कर भी,कभी हँसाती रही।

प्यार के पलों की उम्र कम ही रही
यादों के संग तू खूब जीती रही
तेरे इस नखरे पर मैं कहती रही
बता!जिंदगी तू और बता।
अपर्णा शर्मा
Feb.20th, 2026

Blog at WordPress.com.

Up ↑