पीर

मन की पीर कभी न कहिये,रखो दिल में छिपाए
होती बड़ी जग हँसाई,गर किसी को भनक लग जाए।

दर्द को बांटने वाले भी,होते हैं बातों के छलिये
कब ठग लेंगे जान न पाओगे,दुख को सुनते सुनते।
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सोच समझकर किसी को,अपनी पीर सुनाना
सारी दुनिया में गूंजेगा,फिर तेरी कमियों का तराना।

दुनिया को बस,सबके दुख पर ही हँसना आता
देख किसी की खुशियों को,भूल जाते वो मुस्काना।
अपर्णा शर्मा
Sept. 25th,2026

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