हमें खुद को नहीं पता कि हम क्या हैं?
और उसने हमारा पूरा किरदार गढ़ दिया।
अचरज कैसा ? आप भी बाहर आइए
देखिए! आप पर कितना कुछ लिख दिया।
हमें खुद को नहीं पता कि हम क्या हैं?
और उसने हमारा पूरा किरदार गढ़ दिया।
अचरज कैसा ? आप भी बाहर आइए
देखिए! आप पर कितना कुछ लिख दिया।
बेटे -बेटियाँ दोनों खुद के आशियाँ बसा लेते हैं
अपने -पराए से परे अपने आसमाँ खुद तलाशते हैं।
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दोनों के ही अपने बेहतरीन वज़ूद सदा से रहे हैं
अधिक और कमतर बस सोच के ही मामले हैं।
अनंत तक, कोशिशें जारी रहे, कि द्वेष भाव, स्नेह बन जाए।
अंत तक, कोई कोशिश न हो, कि प्रीत भाव, बैर बन जाए।।