मोहब्बत का असर कुछ ऐसा हुआ
ज़िंदगी जीने का नजरिया बदल गया।
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इश्क नहीं,मोहताज कभी तारीखों का
दिल मिले और चहुँ ओर बसंत खिल गया।
मोहब्बत का असर कुछ ऐसा हुआ
ज़िंदगी जीने का नजरिया बदल गया।
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इश्क नहीं,मोहताज कभी तारीखों का
दिल मिले और चहुँ ओर बसंत खिल गया।
जिंदगी के दिए में उम्र बाती सी जल रही
शुक्र है कि उम्मीद की लौ में वो तर रही.
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कभी मंद कभी तीव्र सी रोशनी बिखेर रही
खुशी और ग़म दोनों में हौंसला सीखा रही.
हमें खुद को नहीं पता कि हम क्या हैं?
और उसने हमारा पूरा किरदार गढ़ दिया।
अचरज कैसा ? आप भी बाहर आइए
देखिए! आप पर कितना कुछ लिख दिया।