ठोकर

ठोकरें भी जरूरी सी रही जिंदगी में
जो ताउम्र सम्भल कर जीना सिखा गई।
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उड़ते रहे जो सारे जहाँ औ आसमाँ में
कि आंधियां पंखों को साध ना सिखा गई।
अपर्णा शर्मा
Oct.24th,23

फुर्सत

कहीं व्यस्तताएं अनगिनत हैं,कि फुर्सत ढूंढे नहीं मिलती।
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कहीं फुरसतिया ना समझे कोई, सो व्यस्तताएं ओढ़ ली।
अपर्णा शर्मा
Oct.17th,23

जीवन में साँझ

जीवन के सफर में आते कई पड़ाव
कभी आशा भरी होती सुर्ख उजास।

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ऊँचाईयां छूता मध्याह्न जीवन का
फिर शीतलता दे जाती जीवन में साँझ।
अपर्णा शर्मा
Oct.10th,23

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