पहचान

मोहब्बत-ए-पैगाम,हर्फ दर हर्फ दिलों में घुलता गया।
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हर्फ ही हैं,जो इंसान की इंसान से पहचान करा गया।
अपर्णा शर्मा
September 3rd, 24

छल

अपना बना कर वो,साथ चलता गया
धीरे-धीरे सभी से,बहुत दूर करता गया।
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समझ न सका,वो दोस्त रहा या रहा दुश्मन
जो अपनों से दूर ,तन्हा कर,सबकुछ हो गया।
अपर्णा शर्मा
August 27th, 24

तरीका

किसी ने कब चाह,कि हंगामा खड़ा हो
मकसद शायद अपनी बात कहने का हो
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गर बात करने और रखने का तरीका न आए
तो मुमकिन है कि हर बात पर हंगामा खड़ा हो।
अपर्णा शर्मा
Aug.13th,24

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