स्वार्थ हेतु हज़ारों -हजार पेड़ों पर,हिंसा करता रहा जो मनुष्य
https://ae-pal.com/
पृथ्वी दिवस पर कह रहा, लगाओ पेड़ ताकि उज्ज्वल हो भविष्य।
अपर्णा शर्मा
April22nd,25
साथ
किसी को अफ़सोस रहा कि कभी किसी का साथ न मिला।
https://ae-pal.com/
कोई सदमें में है कि अंगुली पकड़ने वाला गुमराह कर चला।
अपर्णा शर्मा
April 1st,25
कभी-कभी
कभी-कभी अवचेतन मन में भावों के बादल घिरते है
तभी-तभी शब्दों के कोलाहल में अर्थ खोने लगते हैं।
https://ae-pal.com/
व्यस्तताओं का,उच्चतम बिंदु के,उच्च तक बढ़ जाना
और कभी गहन खालीपन,भावों को खाली कर देते हैं।
अपर्णा शर्मा
March25th,25
