नन्हे नन्हें बदरा,आसमान में खेल रहे .
लुका छिपी करते करते, हरदम वो दौड़ रहे।
हवा उनको पकड़े कैसे? बदरा आगे आगे भाग रहे
थक कर बैठी जब हवा उसका दम भी घोंट रहे।
https://ae-pal.com/
सूरज ने ताप बढ़ाकर, बादल पर रौब जमाया
इस सबमें धरती को भी अग्नि जैसा खूब जलाया।
धरती को जलता देख,आसमान ना सह पाया
उसने झुक कर बादल को फिर अपने पास बुलाया।
https://ae-pal.com/
नन्हे नन्हे मोती जैसे, बादल ने जल बरसाया
हर्ष से झूम उठी धरती, देखो देखो सावन आया।
अपर्णा शर्मा
July 10th, 23
गुरु
सदा से,बालक की प्रथम गुरु, माँ ही कहलाती।
ममता में वशीभूत हो, नेह भरी दुनिया दिखलाती।
पिता जीवन में, सदैव से कटु पाठ पढ़ाते।
बालक को दुनिया की,सत्यता का ज्ञान कराते।
https://ae-pal.com/
एक गुरु ही है जो बालक को शुद्ध पाठ पढ़ाते।
कभी प्रेम से,कभी डपट से दुनिया को दिखाते।
संस्कारों से परिपूर्ण बालक घर का मान बढ़ाता।
व्यवहार सीखा गुरु, बालक को,उन्नति का मार्ग दिखाता।
(गुरु पूर्णिमा पर)
अपर्णा शर्मा
July 3rd, 23
जीवन में कागज
कश्ती बना तैरा दी बारिश में
तब जाना कागज को जीवन में
नित नए नए खेल जुड़ते गए
खूब जहाज उड़ाए नील गगन में।
जीवन में कागज का आगाज हुआ।
https://ae-pal.com/
अंजुरी में खिली कलिया कागज की
खुशबू महके जिनमें बचपन की
चोर,सिपाही,राजा,वजीर की पर्चियां
छुपी खट्टी-मीठी लड़ाई अपनेपन की।
जीवन में कागज का उन्नयन हुआ।
खेलों की पर्चियां पाती रूप में आई
कागज का रुप धर प्रेम ऋतु आई
धीरे-धीरे पाती जीवन में बनी दस्तावेज
एक अदद रोजगार की भागदौड़ आई ।
जीवन में कागज श्रंगार हुआ ।
https://ae-pal.com/
आहिस्ते से आगाज हुआ पीली चिट्ठी का
हरा हरा सब दिखा,हाथ में कागज आया हरा
तब फिर कागज वसीयत में तब्दील हुआ
अचानक अश्रु दे गया वो कागज कोना कटा।
जीवन कागज में अंकित हुआ।
अपर्णा शर्मा
June 30th, 23
