पर्दा



कभी खूबसूरती बढ़ाता
कभी सम्मान दिलाता।
लज्जा को भी दर्शाता
सुंदरता का आभास कराता।
शब्दों में ग़र हो पर्दा
निकटता को बढ़ाता।
आचरण का पर्दा
आपसी सौहार्द लाता।
वहीं अच्छाई पर पर्दा
बुराईयां ही बढ़ाता।
शिक्षा पर पर्दा
अशिक्षा ही लाता।
खिड़कियों पर पर्दा
चार चाँद लगाता।
दुल्हन का घूंघट
सूरज सा दमकता।
आँखों का पर्दा
सबसे ही उत्तम
आँखों पर पर्दा
अंध विश्वास का द्योतक।
दिमाग का पर्दा
अल्पज्ञान दिखाता
पर्दा कभी सही, कभी गलत
का सदा ज्ञान कराता।
अपर्णा शर्मा
Oct.6th,23

मन

है मन बावरा
मन बेचैन
तन में मन की
गहरी पैठ।
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कभी ज़मी पर
कभी फुनगी बैठे
किनारे तकता
मझधार में नाचे।

मन ही मन का मीत
बतियाए दिन और रैना
हर टेढ़े सवालों का
जवाब देता हरदम पैना।
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ख्वाबों में तैरे मन
दूर दूर तक सैर करे
यहीं मेरा एक मनमीत
जो चेहरे पर मुस्कान धरे।
अपर्णा शर्मा
Sept.29th,23

दहलीज

ऊषाकाल में,स्वागत हेतु जल छिड़काव से
आशा के चटक रंगों में सजी रंगोली से
चहुँ दिशा फैल जाता, शुभ संदेश दिवस का
ऐसे बता देती हैं दहलीज मिजाज घर का।
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दोपहर होते ही पसर जाती है उदासी की चादर
झूलती है,आशा निराशा के झोंके ले थकान के झूले पर
न जाने किस के आराम में पड़ी है खटिया इंतजार की
रौनक, बेरौनक खूब बयां हो रही, घर की दहलीज पर।

गोधूलि में गैया के लौटते ही,बछड़ो का रंभाना
घोंसलो में पंछियों का चहचहाते हुए लौटना
आशा का संचार मन मस्तिष्क को तृप्त करता हुआ
और चुपचाप एक दिया इंतजार का दहलीज पर रोशन करना।
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रात को दहलीज को इंतजार है किस्से कहानियों का
बालकों की हंसी ठिठोली में डूबी मस्तियों का
देखती है बंधन की डोर को मजबूत होते हुए
और मुस्कराकर,खुशी को छिपा बंद कर लेती हैं दर दहलीज का।
अपर्णा शर्मा
Sept.22nd,23

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