जो सभी अनकही को जुबां दे जाती है
वो सारी बतकही निगाहों से हो जाती है।
ये नहीं कि सिर्फ मोहब्बत का इजहार करती हैं
खामोशी से हर बात से साफ़ इंकार करती हैं।
https://ae-pal.com/
ग़मों का सैलाब जो दिल में बाँध कर रखा था
ये पनीली निगाहें सारे दर्द को बयां करती हैं।
मेरी और उसकी और न किसकी किसकी कहे
ये बोलती निगाहें सभी की चुगली खूब करती हैं।
https://ae-pal.com/
यारों की महफ़िलों में जब हँसी मज़ाक सजते हैं
वहीं दो निगाहें चार हो कर नई दुनिया बसती है।
मैं जी रहा झंझटों में, वो भी कुछ झमेलों में फंसा है
जब मुस्कुराए,ये निगाहें तो जिंदगी आसान होती है।
अपर्णा शर्मा
July 19th,24
पदचिन्ह प्रेम के
घुँघरूओं की रूनझुन से दूर
प्रेम पदचिन्हों की छाप
मन आँगन के द्वार पर ली जैसे
नववधु के प्रथम पग की छाप।
https://ae-pal.com/
सहेज कर रखा है उसे
कोरे मन की श्वेत चादर पर
संदूक के कोने में समेट कर
दाग से बचा, सम्भाल कर।
प्रेम का विछोह,दर्शित है
उर्मिला के जीवन की सच्चाई में
प्रेम मात्र पाना नहीं, है खोना
खो जाना अनंत प्रेम की गहराई में।
https://ae-pal.com/
प्रेम के चरण चिन्हों को
अपने मन मंदिर में सजाकर
और चरण वंदन करता रहूँ
जीवन के हर शुभ अवसर पर।
अपर्णा शर्मा
July18th,24
आस
पिता,भाई,प्रेमी, पति के संग-संग,पुत्र भी लिखा कर लाए हैं जीवन पर्यंत संघर्ष
और माँ,बहिन,प्रेमिका,पत्नी के संग-संग पुत्री को मिला है जीवन पर्यंत का इंतजार।
https://ae-pal.com/
स्त्री,पुरुष दोनों ही अपने अपने क्षेत्र में अपना अव्वल दिए जाते हैं
तभी तो संघर्ष और इंतजार एक साथ सफल हो जाते हैं।
https://ae-pal.com/
दोनों एक दूजे के आस्था और प्रेम को जेहन में रखते हैं
इस तरह संघर्ष और इंतजार संग प्रेम को भी जीत जाते हैं।
https://ae-pal.com/
काश ! कभी,किसी की भी किसी से,आस खत्म न हो
कभी वो उसके संग खड़ा हो, कभी उसके संग वो खड़ा हो।
अपर्णा शर्मा
July12th,24
