सिंदूर

सिंदूर पर्याय है सुहाग का
सौन्दर्य का, अभिमान का
नारी के दमकते शीर्ष पर
प्रतीक है पति के प्रेम का।
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माथे की लाली तृप्ति दर्शाती
जीवन के प्रति उत्साह मनाती
सिंदूर बिन सूनी सी मांग को
स्त्री श्रृंगार को अधूरा मानती।

सिंदूर नहीं प्रतीक विवशता का
नहीं प्रतीक है, किसी बंधन का
रिश्तों के प्रेम और विश्वास को
चेहरे पर चांदनी सा झलकाता।
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लाल रंग समझने की भूल न करना
यह प्रतीक है शक्ति और अग्नि का
मान से दमकते समाज और संस्कृति का
स्त्री के मांग में सजते हुए अभिमान का।
अपर्णा शर्मा
May9th,25

आईना*

आईना आज मुझ से शिकायत करने लगा
तुझमें अब कुछ पहले सा दिखता नहीं
कैसे अब मैं तुझको खूबसूरत दिखाऊँ
कि नक्श में अब पुराना दिखता नहीं
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वो मासूमियत जो बचपन की सौगात रही
अब आसपास मुझे दिखती ही नहीं
सयानी सी आईने में सजी तेरी ये तस्वीर
जिसमें सुकूं आजकल उभरता ही नहीं।
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मन में सजी तस्वीर को संवारती रहा कर
दृढ़ निश्चयी को दुनिया बदलती नहीं
मुझको साफ़ करने से कुछ न होगा
फराखदिल फितरत को बदलती ही नहीं।
अपर्णा शर्मा
May2nd,25

*फराखदिल-उदार

साथ

मंज़िल की तलाश में
चलते रहे दूर राह में
सोचों से रहे बहुत दूर
चलते रहे बस साथ में।
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हाथ अपने ही हाथ में
डूबे अपने ही विचार में
वो बनकर हमसफर
अनजान से पूरे सफर में।
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दिखे नहीं किसी विवाद में
पड़े नहीं कभी तकरार में
बस साथ है कि साथ है
न इकरार में न इजहार में।
अपर्णा शर्मा
April25th,2025

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