अद्भुत तत्वों का मिश्रण मानव देह कहलाया,जिसमें अवनी,अग्नि,अंबर समीर और नीर समाया।
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आलौकिकता से भरा संसार लौकिकता लोलुप हुआ,इस सबमें भरमाया मानव पत्थर की मूर्त हुआ।
अपर्णा शर्मा
July 18th,23
अद्भुत तत्वों का मिश्रण मानव देह कहलाया,जिसमें अवनी,अग्नि,अंबर समीर और नीर समाया।
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आलौकिकता से भरा संसार लौकिकता लोलुप हुआ,इस सबमें भरमाया मानव पत्थर की मूर्त हुआ।
अपर्णा शर्मा
July 18th,23
नन्हे नन्हें बदरा,आसमान में खेल रहे .
लुका छिपी करते करते, हरदम वो दौड़ रहे।
हवा उनको पकड़े कैसे? बदरा आगे आगे भाग रहे
थक कर बैठी जब हवा उसका दम भी घोंट रहे।
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सूरज ने ताप बढ़ाकर, बादल पर रौब जमाया
इस सबमें धरती को भी अग्नि जैसा खूब जलाया।
धरती को जलता देख,आसमान ना सह पाया
उसने झुक कर बादल को फिर अपने पास बुलाया।
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नन्हे नन्हे मोती जैसे, बादल ने जल बरसाया
हर्ष से झूम उठी धरती, देखो देखो सावन आया।
अपर्णा शर्मा
July 10th, 23
बहुत शुक्रिया, ए जिंदगी! तूने खूब घावों से नवाजा
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जब जब हरे हुए घाव, तब तब पुरवा को पहचाना।
अपर्णा शर्मा
July 11th, 23