खनकती जिंदगी के,कुछ हिस्से,सहेज कर रख लिए।
यूँ जिंदगी के,कहे,अनकहे किस्से,महफूज कर लिए।
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हम तो,जीते रहे जिंदगी को,जैसे टूंगते हो चबैना
यों कुछ टुकड़े,यादों की गुल्लक में,जमा कर लिए।
अपर्णा शर्मा
Feb.13th,24
खनकती जिंदगी के,कुछ हिस्से,सहेज कर रख लिए।
यूँ जिंदगी के,कहे,अनकहे किस्से,महफूज कर लिए।
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हम तो,जीते रहे जिंदगी को,जैसे टूंगते हो चबैना
यों कुछ टुकड़े,यादों की गुल्लक में,जमा कर लिए।
अपर्णा शर्मा
Feb.13th,24
नक्षत्रों का निरंतर पारगमन
और दिवस का नित आगमन।
सभी एक चक्र से बंध कर
करते अनुशासन का मार्गदर्शन।
समय पर चल कर
समय पर काम कर।
समय के इस ध्यान को
अनुशासन का मान कर।
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समय ग़र टालते जा रहे
आराम यूँ ही फरमाते रहे।
काम को यदि हो घसीटते
कराहता अनुशासन रहे।
अपना खूब ख़्याल कर
किसी को बेहाल न कर।
समय सभी का क़ीमती
अनुशासन का ख़्याल कर।
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न तू अवरोध उत्पन्न कर
न अवरोध को सही कर।
अवरोध ही अनुशासनहीनता
स्वसंचालित हो और अनुशासन धर।
अपर्णा शर्मा
Feb.9th,24
धरती ने कुहासे का आवरण हटाकर देखा,अपने सम्मुख माघ को पाया
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धरा मुस्काई और प्रकृति ने कहा आह ! फिर बसंत आया।
अपर्णा शर्मा
Feb.6th,24