कभी खूबसूरती बढ़ाता
कभी सम्मान दिलाता।
लज्जा को भी दर्शाता
सुंदरता का आभास कराता।
शब्दों में ग़र हो पर्दा
निकटता को बढ़ाता।
आचरण का पर्दा
आपसी सौहार्द लाता।
वहीं अच्छाई पर पर्दा
बुराईयां ही बढ़ाता।
शिक्षा पर पर्दा
अशिक्षा ही लाता।
खिड़कियों पर पर्दा
चार चाँद लगाता।
दुल्हन का घूंघट
सूरज सा दमकता।
आँखों का पर्दा
सबसे ही उत्तम
आँखों पर पर्दा
अंध विश्वास का द्योतक।
दिमाग का पर्दा
अल्पज्ञान दिखाता
पर्दा कभी सही, कभी गलत
का सदा ज्ञान कराता।
अपर्णा शर्मा
Oct.6th,23
पिंजरा
अपनी खुशी के लिए किसी को बाध्य करना
जैसे उस को अपने पिंजरे में कैद करना.
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हर हाल में सभी की खुशियो का ख्याल करना
ऐसा ही है,जैसे खुद के लिए पिंजरा तैयार करना.
अपर्णा शर्मा
Oct.3rd,23
मन
है मन बावरा
मन बेचैन
तन में मन की
गहरी पैठ।
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कभी ज़मी पर
कभी फुनगी बैठे
किनारे तकता
मझधार में नाचे।
मन ही मन का मीत
बतियाए दिन और रैना
हर टेढ़े सवालों का
जवाब देता हरदम पैना।
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ख्वाबों में तैरे मन
दूर दूर तक सैर करे
यहीं मेरा एक मनमीत
जो चेहरे पर मुस्कान धरे।
अपर्णा शर्मा
Sept.29th,23
