खाली हाथ

जीवन में एक से बढ़कर एक मिलता रहा
उसके बिना जीना नामुमकिन सा लगता रहा।
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जब छुटा कोई, लगा, खाली हाथ ही रहा
यूँ जिंदगी भर ऐसे ही हाथ मलता रहा।
अपर्णा शर्मा
Jan.16th,24

अनचाहा अतिथि

कक्षा में गहन सन्नाटा छा गया
छात्रों का चेहरा सफेद हो गया
सुनकर इस अतिथि का नाम
घबराहट का माहौल हो गया।
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सारी शैतानियाँ रफ़ू चक्कर हो रही
पाठ्यक्रम पूर्ण हो, रणनीति बन रही
एक दूजे को सहयोग की भावना के साथ
छात्रों में अतिथि सत्कार की बैठकें हो रही।

अतिथि आगमन की तिथि निर्धारित है
एक माह तक विश्राम का एलान है
प्रत्येक तिथि पर भिन्न भिन्न है कार्यक्रम
सभी को सफल बनाने की योजना है।
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हँसी, ठिठोली से दिन थे गुजार रहे
विद्यालय में जिंदगी को खूब जी रहे
परीक्षा नाम के इस खूंखार अतिथि से
मस्तमौला छात्र भी अब संजीदा हो रहे।
अपर्णा शर्मा
Jan.12th,24

तकदीर की लकीरें

यूँ तो लकीर के फकीर होना बिल्कुल सही नहीं
और ज़माने ने सिखाया लकीर पीटना भी ठीक नहीं ।
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गर बदलनी हो, किसी को,अपनी तक़दीर की लकीरें
पानी सी कर जिंदगी, जिसमें खिंचती कोई लकीर नहीं।
अपर्णा शर्मा
Jan.9th,24

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