मन की बातें ,कहने का तो, मन खूब ही करता है
फिर अपना विश्लेषण,हो जाने से भी मन डरता है।
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सरल हृदय से, जिसने जब अपना हाल सुनाया
सुनने वाला ही अक्सर,सुनकर जग हँसाई करता है।
अपर्णा शर्मा July 30th,24
मन की बातें ,कहने का तो, मन खूब ही करता है
फिर अपना विश्लेषण,हो जाने से भी मन डरता है।
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सरल हृदय से, जिसने जब अपना हाल सुनाया
सुनने वाला ही अक्सर,सुनकर जग हँसाई करता है।
अपर्णा शर्मा July 30th,24
किसी तरह रात को विदा कर के
दरवाजे खोल, दहलीज पर तड़के
छिड़क देती है,रोज पानी के छींटे
करती हैं वो रोज इंतजार।
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किवाड़ के पल्ले की ओट में
घोर रात में या उजली भोर में
सदा आशीष देती है मन मन में
करती है वो रोज इंतजार।
यद्यपि सामाजिक प्रतिष्ठा को
और पुत्र के उज्ज्वल भविष्य को
भेजा है परदेश टुकड़ा-ए- जिगर को
करती फिर भी रोज इंतजार।
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जानती है आगमन की तिथि हैं तय
जानती है समय करती व्यर्थ ही व्यय
फिर भी मन को बाँटकर देखती है बाट
करती हैं वो अनवरत इंतजार।
अपर्णा शर्मा
July26th,24
पत्थर दिल ने फूल पत्थरों में फेंककर
अपने दिल का मिजाज बता दिया।
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फूलों ने भी पत्थरों में मुस्करा कर
पत्थरदिलों को अपना एलान सुना दिया।
अपर्णा शर्मा
July 23rd,24