पतझड़

फलक,गर दरख्त से गिरे, तो सदा पतझड़ नहीं होता
https://ae-pal.com/
गर गिर जाए, अख़लाक़ घरों में,फिर बसंत नहीं होता।
अपर्णा शर्मा
Feb.25th,25

मौन इश्क

वो भी क्या दौर था
जब इश्क मौन था.
इस जुदा से दौर में
इश्क शोर कर रहा।
https://ae-pal.com/
कभी इश्क चंचलता नहीं
समझदारी का सफर रहा.
आज मुखर होता इश्क
चपलता को बिखेर रहा।

बनावट से भरे समाज में
अब इश्क वाचाल हो रहा
मधुर प्रेम अब मौन नहीं
मौज सा मचल रहा।
https://ae-pal.com/
मौन इश्क,स्वप्न हुआ
विगत सा अब खो रहा
बिना इज़हार,उपहार के
अब इश्क न भा रहा।
अपर्णा शर्मा
Feb.14th,25

Blog at WordPress.com.

Up ↑