आज दिल को भी मिल गई आजादी।
आज आजादी दिवस पर आजाद सा दिल यूँ बयान करने लगा कि आप सब मनुष्य भी बिना किसी में दिमाग लगाए बस जो सब करते हैं वहीं किए जा रहे हो।
मैंने कहा माना आज आजादी दिवस घोषित किया गया है लेकिन तुम हद पार करने की कोशिश कर रहे हों मुझे ऐसा क्यूँ लग रहा है?पर दिल तो है दिल बोला आज मुझे भी अपने अंदर के ज्वार को कम करने दो।
आखिर आजादी का दिन है। मैंने कहा बोलो पर कोई गुस्ताखी नहीं. वो आज्ञाकारी बालक की तरह मुस्कराया। कहने लगा कि आप कभी कोई सा दिवस मनाते हैं कभी कोई सा अभी कुछ समय पहले चाय दिवस आया और आप ने इस जून की गर्मी में न जाने कितनी चाय पी और मुझे झुलसा दिया।मेरा जो रक्त संचार का कार्य है वो भी बाधित होने के कगार पर आ गया पर आप सारी ऊर्जा,दिवस को सफल बनाने लगाते रहे और जो सहयोगी न बने उन्हें चाय के गुण पता न होने के आरोप लगाते रहे।
मैंने कहा,अच्छा !ठीक है,ठीक है।हमने उसके बाद तंबाकू निषेध दिवस भी मनाया। उस दिन तो निकोटीन जैसे हानिकारक तत्व से दूर ही रहे। दिल बोला, हाँ,हाँ। अब तुम दिमाग से बात कर रहे हों। मैंने कहा, ‘नहीं,नहीं। ऐसा नहीं है। मैं आज सिर्फ तुम्हारी सुन रहीं हूँ, आखिर आज आजादी है कहने की।
सुनो दिल! मैं तुम्हें एक बात और बता दूँ कि उसके बाद हमने साइकिल दिवस और पर्यावरण दिवस भी मनाया था।वो तो तुम्हारे स्वास्थ्य के लिए बेहतर रहे होंगे। अरे ये क्या? यह सुनते ही, दिल तो बिफर गया और बोला साइकिल दिवस पर आप सब बस तस्वीर खिंचवाने में लगे रहते हो,वैसे भी एक दिन की साइकिल चलाने से मुझे कोई लाभ नहीं होता है। अधिकांशतः सड़को पर अतिक्रमण इतना है कि साइकिल छोड़ो आप मेरे लिए टहल भी नहीं सकते।
तब मैंने पैंतरा बदला और कहा हम पार्क में टहलते है। इस बार मैंने पार्क में पूरे पाँच पौधों का पौधारोपण किया है। अब तो दिल झल्ला गया. बोला, यहीं तो मैं कह रहा हूँ कि आप सब बस एक रौ में बह जाते हैं ।न मेरी सोचते, न मेरे बड़े भाई दिमाग की सुनते हो।
अरे,जून में पौधे लगाए नहीं जाते उनकी छांव में बैठते हैं। वातावरण का आनंद लेते हैं। जुलाई में खूब पौधारोपण करना,इसीलिए अधिकतर पौधे सूख जाते हैं। पर्यावरण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं हैं, इसमें धरती, आसमान, हवा, पानी सब आते हैं उनको स्वच्छ और संरक्षित करना ही,पूर्ण पर्यावरण दिवस कहलाएगा.
उसने मुझे देखा और कहा एक दिवस तो तुम भूल गए जो पर्यावरण दिवस के कुछ दिन मनाया है।मैंने तुरंत कहा वो निर्जला एकादशी थी। वो दिवस नहीं व्रत और जल-दान का दिन था। अब दिल कुटिल मुस्कान के साथ बोला, हाँ,तुमने खूब पुण्य कमाया परंतु उस पर्यावरण का क्या हुआ जो थोड़े दिन पहले जोर शोर से मनाया था। जिसमें आप ने प्लास्टिक के ग्लास आदि से सड़क पर ही कूड़ा नहीं फैलाया बल्कि पूरी धरती को प्रदुषित कर दिया।
मैं निरुत्तर हो गई हूँ। अब गुणी पाठक गण आप ही इसे समझाइए, दिल ने आज़ादी के नाम पर कुछ ज्यादा ही नहीं बोल दिया।
अपर्णा शर्मा
(किसी की आस्था को ठेस पहुँचाना मेरा लक्ष्य नहीं है,दिल में उठे एहसास जो साझा कर दिए)
15th August के दिन भारतवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
