आईने में हो तुम

कभी तुम्हीं आईना थे
अब आईने में हो तुम
संवारता रहा मुझे आईना
उसमें दिखते रहे हो तुम।
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नयनों में गहराता काजल
यादों का लहराता बादल
सुर्ख होते गालों की लाली
आईना कहे सारी हालत।

केशविन्यास करुँ तब ये अलकें
न सुलझे,न संवरे ये काली जुल्फें
तेरी धुन पर करती ता ता थईया
आईने में ये अदा खूब ही झलके।
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प्रेयसी का बस एक निवेदन
सारे श्रृंगार तुझको ही अर्पण
आ जाओ,कहती ये धड़कन
शायद बोल उठे आज ये दर्पण।
अपर्णा शर्मा
Feb.6th, 2026

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