अपने अपनों से मिलने
परदेस को है जब उड़ते
अपनों को यहाँ छोड़कर
क्या याद हमें भी करते?
https://ae-pal.com/
भागमभाग की जिंदगानी में
ऐसे फुर्सत के क्षण भी है आते
उनमें अपनों का अपनापन
क्या वे क्षण खूब रुलाते?
https://ae-pal.com/
यहाँ भी इंतजार की घड़ियां
मानो जैसे बंधन की कड़ियां
फुर्सत भी सूनापन गहराती है
देती यादों की जलबुझ लड़ियां।
अपर्णा शर्मा
Oct.20th,23
फुर्सत
कहीं व्यस्तताएं अनगिनत हैं,कि फुर्सत ढूंढे नहीं मिलती।
https://ae-pal.com/
कहीं फुरसतिया ना समझे कोई, सो व्यस्तताएं ओढ़ ली।
अपर्णा शर्मा
Oct.17th,23
साँझ
जीवन के सफर में आते कई पड़ाव
कभी आशा भरी होती सुर्ख उजास
ऊँचाईयां छूता मध्याह्न जीवन का
फिर शीतलता दे जाती जीवन में साँझ।
https://ae-pal.com/
साँझ अप्रतिम सी करती भाव विभोर
नित नई महफिल से लगे जीवन की भोर
सभी कार्यों से निवृत्त जीवन देता असीम सूकून
शौक अपने पूर्ण करे अब नहीं किसी से होड़।
https://ae-pal.com/
साँझ को रात ना समझना यारो
ये साँझ मेहनत का फल तुम जानो
जीवन में रात जब अपनी चादर तानेगी
साँझ के ये पलछिन ही देंगे, नई ऊर्जा प्यारों।
अपर्णा शर्मा
Oct.13th,23
