इत्मीनान

इत्मीनान का आगाज हो जाए, जब जिंदगी में
और मोहब्बत फूल सी खिल जाए हरेक दिल में।

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तभी दुखों के बादल छंटकर,आसमाँ चमक उठे
समझो,बसंत आकर छा गया सभी के तन-मन में।
अपर्णा शर्मा
Feb.20th,24

गुमाँ होता गया

जब चला था वो सफर को
काफिला संग था साथ को
चलता रहा आगे बढ़ता रहा
नाज़ से देखता वो सभी को।
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सभी मंजिल के इस सफर में
चल पड़े ऊँची नीची डगर में
रुक गए, कुछ मुकाम पा गए
अब भी थे सभी, संग साथ में।

वो सबसे अलग दिखने लगा
बैठक में विलग सा रहने लगा
ठहाके गूँजते जब फ़िजा में
वो बुत बना चुप रहने लगा।
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हौले-हौले उसे गुमाँ होता गया
वो अहं की हुकूमत में समा गया
मैं से भरे इस मुकाबले के खेल में
अहंकार उस का हमसफर बन गया।
अपर्णा शर्मा
Feb.16th,24

महफूज़

खनकती जिंदगी के,कुछ हिस्से,सहेज कर रख लिए।
यूँ जिंदगी के,कहे,अनकहे किस्से,महफूज कर लिए।
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हम तो,जीते रहे जिंदगी को,जैसे टूंगते हो चबैना
यों कुछ टुकड़े,यादों की गुल्लक में,जमा कर लिए।
अपर्णा शर्मा 

Feb.13th,24

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