अब इसकी सजा क्या दोगे?

सुनो! प्रकृति

बिसरती नदियां
बिखरती प्रलय।
फैलती सड़के
सिमटते अरण्य।
बढ़ते पर्यटक
घटता हिमालय।
अब इसकी सजा क्या दोगे?
https://ae-pal.com/
सुनो! समाज

सिकुड़ते घर
बढ़ते खर्च।
घटते विद्यालय
बढ़ते कुतर्क।
घटते उत्सव
बढ़ते अपकर्ष।
अब इसकी सजा क्या दोगे?
अपर्णा शर्मा
Jan.16th,26

मूल भाव

पुष्प, शाख,पात सभी सर्द से जड़ हुए शिशिर में
फिर खिलेंगे, महक ही पहचान बनेगी बसंत में।

हिम हुआ हिमालय,आदित्य के वियोग में
फिर प्रवाह बढ़ेगा, प्रकाश की वृद्धि में
https://ae-pal.com/
जुदा हो गया दोस्त, जो बसा था उसके जिगर में
पर दोस्ती आज भी जिंदा है,उसकी हर फ़िकर में।

समय के सैलाब में खो दिया, उसने अपने महबूब को
मोहब्बत पर नाज़ कर, मानता है वो हर उसूल को।
https://ae-pal.com/
कभी-कभी बदल जाते हैं, व्यवहार रिश्तों में
नहीं बदलता पर, मूल भाव किसी रिश्ते में।
अपर्णा शर्मा
Jan.9th,2026

वीरानगी

परेशानियों के आते ही
खुशियाँ मेहमान बन गई।
https://ae-pal.com/
जैसे पतझड़ के आते ही
बाग में वीरानगी छा गई।
अपर्णा शर्मा
Jan.6th,26

Blog at WordPress.com.

Up ↑