देहरी के पार

धीरे-धीरे अवधि समाप्ति पर आई है
विदाई की बेला पास और पास आई है।

समेट लिया उसने बक्सा समय का
बना लिया बही खाता हर तारीख का।

भर लिया हँसी खुशी की यादों का खजाना
टंगा है थैला भी, जिस में बोझ है दुखों का।

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जा रहा है,सबके कुछ ना कुछ काम करके पूरे
दे जाएगा, नवागत को, जो रह गए काम अधूरे।

देहरी के दूसरी ओर , कुछ पग की दूरी पर
वो खड़ा है, उत्साहित सा अपने आगमन पर।

आगत की खुशी और विगत के विदाई की विडंबना
विदाई ले 2022,थमा देगा 23 को सभी कार्य योजना.

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ओस



ना जाने कौन, रात भर आँसू बहाता रहा।
चांदनी रात में, किसे याद कर, जागता रहा।

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छिप गया, सूरज की पहली किरण के साथ ही।
भिगो गया, सम्पूर्ण धरा को सुना के कथा प्रीत की।

क्रिसमस



देखो! आया क्रिसमस का त्योहार
सर्दी में करता, खूब ऊर्जा का संचार।

सैंटा आता, अपने रथ पर, होके सवार
बच्चों को देता,सुन्दर,प्यारे-प्यारे उपहार।

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पर्व पर सबकी मुरादें पूरी करने
सोई भावना को दिल में जगाने।

सबमें जीने की चाह जगाता है
सबको ही आशावान बनाता है।

आगत साल की नई सी खुशराह दिखाता है
क्रिसमस बेरंग जीवन को सुर्ख रंग जाता है।

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