समझौते

मासूम रही जब तक ज़िंदगी
बिंदास जीते रहे
समझदारियों ने फिर धीरेधीरे
समझौते सिखा दिए।


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जब मन के चपल समंदर में
ख्वाहिशों के ढेरों ज्वार उठे
तब समझौते के शांत भाटा ने
जिम्मेदारी के किनारे दिखा दिए।

समझौता शब्द जब पढ़ा मैंने
सम का अर्थ बराबर समझा
और समझौते के क्रियान्वयन
सदा एकतरफा ही दिखाई दिए।

किरदार

हमें खुद को नहीं पता कि हम क्या हैं?
और उसने हमारा पूरा किरदार गढ़ दिया।

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अचरज कैसा ? आप भी बाहर आइए
देखिए! आप पर कितना कुछ लिख दिया।

प्रेम सदा अधूरा



एक क्षण में पनपा, वो प्यारा एहसास.
जीवन भर रहता जिसका मन में वास।

प्रेम सागर में दो जन,होते जैसे एक जान.
चिर प्रेम,हृदय तल में,स्थिर हो,पाता मान।

अनवरत राही,से चलते रहते,प्रेमी प्रेम डगर.
चाह यहीं, साथ में पूर्ण हो,जीवन का सफर।

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प्रेम प्रसंग,लघु कहानियों का,बनता प्रेमागार
दो जने जुड़ कर,प्रेम को देते,मनोरम आकार।

प्रेम धारा में,निरंतर बहते जाना ही,तर जाना हैं
सम्पूर्ण प्रेम,राम कृष्ण को भी कहाँ मिल पाया हैं।

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