हंसती, मुस्कराती ,चहकती है
हर अंदाज में शोर रखती है ।
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खुशनुमा माहौल बना कर दोस्तों
अनकहा शोर दबाए फिरती है ।
हंसती, मुस्कराती ,चहकती है
हर अंदाज में शोर रखती है ।
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खुशनुमा माहौल बना कर दोस्तों
अनकहा शोर दबाए फिरती है ।
हर कली पुष्पित हो झूम रही
उपवन को सुरभित कर रही
प्रफुल्लित मन में जगती तृष्णा
पुष्प पाने की आस जगा रही।
विपुल अभिलाषा सदा रखे
पुष्प जो शूल कंटको से घिरे
मन प्राण में लालसा को जगाए
अंगीकार को मन उपवन तरसे।
हर कली पुष्प के समीप ही
पत्तियों के साथ साथ शूल भी
कुसुम को रक्षित कर रहे
एषा बनी आकाश कुसुम सी।
कंटक नहीं ये कवच से डटे
पुष्प की रक्षा को अडिग खड़े
कोई भी प्रहार करे पुष्प पर
लहू-लुहान कर उसे जा चुभे।
जिंदगी में सादगी भी नाटक सी जी रही
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वक़्त देख कर ओढ़ी और उतारी जा रही.