मुखौटे

इक मासूम चेहरा ईश्वर प्रदत
उसपर सजे मुखौटे अनगिनत।

कभी सत्य का, कभी असत्य का
कभी प्रेम का और कभी छल का।
https://ae-pal.com/
जब जिस मुखौटे से काम निकले.
वहीं मुखौटा ठाठ से मुख पे चमके।

यदि दुनिया परिचित हुई,इस कला की
विषादिता ही सिर्फ मित्र है ऐसे इंसान की।
https://ae-pal.com/
स्वयं सदा वास्तविक रूप में ही रहिए
मुखौटावानों को पहचानते ही सतर्क होइए।
अपर्णा शर्मा
19th May 23

एक ख़्याल

रिश्तों की चादर पर मोहब्बत के बेल बूटों को काढ़ लिया करों ।

https://ae-pal.com/
ख़ुशहाल मुस्तकबिल के लिए यादों का बक्सा भर लिया करों ।

अपर्णा शर्मा

16th May 23

माँ

बालपन के कोमल हृदय पटल पर, नित इक स्वप्न उपजता है.
निश्चल उम्र की लघु बुद्धि में,स्वप्न का रेखाचित्र उभरता है.

धुंधले से उस रेखाचित्र को, माँ रोज नए रंग दे जाती है.
संतान रंगरूपी दिशा निर्देश से, उसमें चित्रण करती जाती है.
https://ae-pal.com/
स्वप्न का अस्पष्ट सा खाँचा निश्चय ही पूरा हो जाता है
जब माँ का संग निश्चित ही, हरपल, हरदम रहता है.

एक दिन ऐसा आता है जीवन में,रेखाचित्र पूरा हो जाता है .
स्वप्न का कल्पित चित्रण वर्तमान में, खिलता,फलता जाता है.
https://ae-pal.com/
जब माँ बालक के सपने को स्वयं भी आत्मसात कर लेती है.
ऐसी माँ की संतान सदा ही जीवन में उच्च लक्ष्य पा जाती है.
अपर्णा शर्मा
14.5.23
(मदर्स डे पर )

Blog at WordPress.com.

Up ↑