दो पंक्ति

किसी को प्यार, मोहब्बत, इश्क, प्रेम हुआ तो क्यूं जाने।
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मिलन,विरह,से परे आसक्ति तक प्रेम हुआ तो माने।
अपर्णा शर्मा
June16th,2026

दो पंक्ति

इंतजार की घड़ी से जार जार होकर
आँखे थक गई कब से बेजार होकर ।
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खुद_ब-खुद जब ख्वाबों से हुई गुफ़्तगू 
पलकें झुक गई ख्वाब को सच समझ कर।
अपर्णा शर्मा
June 10th,2026

दो पंक्ति

जब कि युद्ध का अंत, वार्तालाप में ही है।
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तब भी वार्तालाप से पहले,युद्ध ही है।
अपर्णा शर्मा
April8th,2026

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