जिंदगी के सीधे से रास्तो पर ,
अकस्मात आ ही जाते हैं, जब तब तीव्र मोड़
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कोणों से काटते, जटिल रास्ते भी,
कभी बदल न पाए, आशा भरा दृष्टिकोण।
अपर्णा शर्मा
Sept.12th,23
मंजिल
सफ़र ए जिंदगी रही ,कहकहे लगाने में
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मंजिल ए मौत थी ,ख़ामोश सी इंतजार में।
अपर्णा शर्मा
Sept.5th, 23
तलाश
बेदर्द को हमदर्द समझने की भूल कुछ यूँ हो गई
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कि फिर हमसफर की तलाश यूँ मुकम्मल हो गई।
अपर्णा शर्मा
August 29th,23
