समझ ज्यों बढ़ती गई,
मासूमियत खोती रही.
https://ae-pal.com/
मुकाम पार करती गई
जिंदगी तमाम होती रही.
अपर्णा शर्मा
Dec.26th,23
समझ ज्यों बढ़ती गई,
मासूमियत खोती रही.
https://ae-pal.com/
मुकाम पार करती गई
जिंदगी तमाम होती रही.
अपर्णा शर्मा
Dec.26th,23
ऐसा कोई पैमाना भी नहीं
जो प्रेम को तौले सही सही
https://ae-pal.com/
समय ही मात्र उपाय इसका
और कोई मूल्यांकन नहीं.
अपर्णा शर्मा
Dec.19th,23
दिल में छुपी उदासी,चेहरे पर उभर कर आ गई
https://ae-pal.com/
गम की गहराई आंखों की बेरुखी से बया हो गई।
अपर्णा शर्मा
Dec.12th,23