वादा

यूँ तो हाथ दोनों तरफ से ही बढ़े थे
निभाने के वादे भी दोनों ने गढ़े थे।
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अचानक हाथ छूटे और वो दूर हो गए
फिर भी एक दूजे के इंतजार में खड़े थे।
अपर्णा शर्मा
jan. 27th,2026

कशमकश

अजीब सी कशमकश में जी रहे हैं वो
हर नज़र को नज़रअंदाज कर रहे हैं वो।
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जो कभी देखते ही,एक दूसरे को गले लगते थे
मन से कोमल पर,बाहर से सख्त हो रहे हैं वो।

अपर्णा शर्मा jan.20th,2026

वीरानगी

परेशानियों के आते ही
खुशियाँ मेहमान बन गई।
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जैसे पतझड़ के आते ही
बाग में वीरानगी छा गई।
अपर्णा शर्मा
Jan.6th,26

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