ज़माना

गर कोई दीवार सा हो जाए, जो सभी को समझे ,ज़माना उसे सुना जाए
https://ae-pal.com/
वो सुने सभी की,ना कुछ कहे, नया चरित्र भी उसी का गढ़ जाए.
अपर्णा शर्मा  june11th,24

दीवार

जन्म जन्मांतर तक सब सुनती रही
सभी के राज,वो अपने तक समेटे रही
https://ae-pal.com/
हाँ,वो दीवार ही थी हर रिश्ते की
जो चुप रहकर रिश्ते निभाती रही.
अपर्णा शर्मा
June 4th,24

‘मैं’

जब जब ‘मैं’जीता है,तब तब ‘हम’ हार गया
https://ae-pal.com/
रंग बदलती दुनिया में,रिश्ता यूँ बेहाल हुआ।
अपर्णा शर्मा
May28th,24

Blog at WordPress.com.

Up ↑