त्योहार इसलिए भी जरूरी,कि जिंदगी में उल्लास आ जाए।
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झंझावातों में उलझे, मनुष्य को, कुछ आराम आ जाए।
अपर्णा शर्मा
March, 11th,25
प्रेम: मात्र शब्द
यूँ तो, चारों ओर, प्रेम जैसे शब्दों का खूब बोलबाला है।
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असल में, प्रेम अब तोल-मोल या लाभ-हानि का मामला है ।
अपर्णा शर्मा
March 4th,25
पतझड़
फलक,गर दरख्त से गिरे, तो सदा पतझड़ नहीं होता
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गर गिर जाए, अख़लाक़ घरों में,फिर बसंत नहीं होता।
अपर्णा शर्मा
Feb.25th,25
