दिल की दास्तान



दिल के किसी कोने में महफ़ूज़ उसकी बातें,यादें मुलाकातें.
वो बिना ओर छोर की लगातार बातें, यादगार मुलाकातें.

अपने ही रंग तरंग में डूब लहराती, मचलती सी गुफ़्तगू.
मेरे हर सवाल को लाजवाब सा जवाब देती गुफ़्तगू.

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नजरो का नज़र से मिलने पर नजर चुरा कर देखती नज़रे.
पास आते ही रास्ता बदल दूर तक पीछा करती नज़रे.

सूखे फूल,तीन पत्ती, काग़ज़ के पीले पन्ने है जिंदगी की यादें.
खजाना खूब है पाया मोहब्बत में खो कर मिली है दर्द सी यादें.
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शरारतों से भरे दिन,एक चुप्पी को समझ बैठते थे
मुलाकातें.
पास से गुज़रे,जमघट में कभी उठते-बैठते, यही थी मुलाकातें.

सात पर्दों में छिपी, महफूज रखी है मैंने दास्तान.
मुमकिन नहीं पर यहीं है मोहब्बत से रीते दिल की दास्तान.

समझौते

मासूम रही जब तक ज़िंदगी
बिंदास जीते रहे
समझदारियों ने फिर धीरे–धीरे
समझौते सिखा दिए।


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जब मन के चपल समंदर में
ख्वाहिशों के ढेरों ज्वार उठे
तब समझौते के शांत भाटा ने
जिम्मेदारी के किनारे दिखा दिए।

समझौता शब्द जब पढ़ा मैंने
सम का अर्थ बराबर समझा
और समझौते के क्रियान्वयन
सदा एकतरफा ही दिखाई दिए।

प्रेम सदा अधूरा



एक क्षण में पनपा, वो प्यारा एहसास.
जीवन भर रहता जिसका मन में वास।

प्रेम सागर में दो जन,होते जैसे एक जान.
चिर प्रेम,हृदय तल में,स्थिर हो,पाता मान।

अनवरत राही,से चलते रहते,प्रेमी प्रेम डगर.
चाह यहीं, साथ में पूर्ण हो,जीवन का सफर।

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प्रेम प्रसंग,लघु कहानियों का,बनता प्रेमागार
दो जने जुड़ कर,प्रेम को देते,मनोरम आकार।

प्रेम धारा में,निरंतर बहते जाना ही,तर जाना हैं
सम्पूर्ण प्रेम,राम कृष्ण को भी कहाँ मिल पाया हैं।

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