मन का फेरा

गाँव बसा है तन मन में
हर दम संग में जीता है
शुरुआत में पढ़ा गॉव से
माँ का आँचल भी गीला है
यही तो मन का फेरा है।

शहर में जब से आया
सपनों का पीछा करता है
अपनों के संग रहना चाहा
तो सपनों से नाता टूटा है
यहीं तो मन का फेरा है।


https://ae-pal.com/
पढ़-लिख,नाम करा बाबा का
बाबा से भी नाता टूटा है
देश-विदेश खूब नाम कमाया
शहर तो अपना छूटा है
यहीं तो मन का फेरा है।

इतना सब कुछ पाया कमाया
कहीं न रच बस पाया है
सेवानिवृत हो,सब छोड़छाड़ के
घर को वापिस आया है
यहीं तो मन का फेरा है।


https://ae-pal.com/
सुबह खेत,शाम हाट करे है
सारे संगी घर को आए हैं
बचपन को भरपूर जिए है
फिर से समय फिराया है
यहीं तो मन का फेरा है।

संवाद

मन ही मन होता जब संवाद
हर प्रश्न के उत्तर होते लाजवाब।
जो मन को खुशी से झूमा दे बात
संतुष्ट हो मन,न उठे फिर विवाद।

https://ae-pal.com/

अंतर्मन की हर दुविधा का प्रतिकार होता
स्व संवाद में मन सब को पटखनी दे देता।
संवाद के हर गुण में, मन दक्षता रखता
शिकायतों का पुलिंदा पूर्ण समक्ष रखता।

https://ae-pal.com/

असल में ,जब संवाद के क्षण से टकराए
मिसरी सी आवाज पर धराशायी हो जाए।
त्याग कर सब विवाद,मतभेद भूल जाए
बात करने से,मन धवल सा चमक जाए।

मानसिक आराधना



गर गंगा सा निर्मल जीवन हो जाए,शिव का मनहर स्नान हो जाएगा.
जीवनपथ पर स्वच्छ मार्ग दिखेगा,पग पग में शिव का साथ हो जाएगा.

कंटक सा मन,शिव को कभी ना भाता,राह का कंटक कभी न बनना.
स्वस्थ मन से सबका शुभ चाहा तो शिव को गोखरु स्वयं ही चढ़ जाएगा.

भंग घोट घोट ठंडाई बनी,भंग को शिव की अति प्रिय जान गटक न जाना
ग़र काम को नशे का जैसा पी सकें, स्वयं शिव उन्नति का पर्याय बनाएगा.
https://ae-pal.com/
बेलपत्र जब शिव को अर्पित करना, तन,मन,धन (पत्र)को साध कर रखना
स्वयं से परिचय हो गया तो शिव आत्मा के वृंत से सदा-सदा को जुड़ जाएगा.

शिव को बेर सा सादा फल भी है भाता,ज्यादा फीका कभी मीठा स्वाद चखाए.
जो बेरंग से जीवन में सुख दुःख से भेट कराए, शिव जीवन जीना सिखाए.

शिव को मानसिक व्रत से खूब नवांओ, स्नान, दान का चंदन लगाओ.
जीवन शिवमय हो, प्रपंच घेर न पाएगा, शिव घर घर में बस जाएगा.

Blog at WordPress.com.

Up ↑