सूने होते घर

जब सुबह सवेरे,बिना हड़बड़ी के,काम शुरू हो जाते हैं ।
और बिना,हो-हल्ला के,काम समय पर संपन्न हो जाते हैं ।
घर की अनुशासित दिनचर्या, नित्य सूनापन दर्शाती है ।
बिन कहे ही,जीवन में पसरे सूनेपन को कह जाती हैं ।

https://ae-pal.com/
खड़ी-खड़ी साइकिल का,धीरे-धीरे,कबाड़ बन जाना ही ।
कस्तूरी वस्तुओं का,चुपके से गोदाम में जमा हो जाना भी ।
वस्तुओं का यूँ स्थिर हो जाना,घर का सूनापन बतलाता है ।
बिना कहे ही,जीवन मे पसरा सूनापन कह जाता है ।

शाम की दिनचर्या में,जब घर के मंदिर में,दिया जलाया जाता है ।
दूरगामी सदस्यों हेतु भी,हाथ दुआ को,खुद-ब-खुद उठ जाता है ।
रुखी-रुखी आँखों से,तब अपनों का सूनापन बह जाता है ।
बिना कहे ही, जीवन में पसरा सूनापन कह जाता है ।


https://ae-pal.com/
नौकरीपेशा सदा ही,घर-गाँव से दूर,देश-विदेश में बसते हैं ।
कभी शिक्षा,कभी रोजगार,अपनों से दूर रहने को मजबूर होते हैं ।
आँगन में चाँदनी,परदेश की सिमटी दुनिया का, सूनापन बरसाती हैं ।
बिना कहे ही,जीवन में पसरा सूनापन कह जाती है ।

कभी-कभी सद्भावना की कमी,घर में ,घर कर जाती है I
मेरा-मेरा का भाव भी,दूर,फिर दिल से दूर कर जाता है ।
घर के कक्षों के ताले,अपनों का सूनापन बतलाते है ।
बिना कहे ही,जीवन में पसरे सूनेपन कह जाते हैं ।

रिश्तों की दुनिया

जन्म से पूर्व मिल जाते हैं स्नेही से रिश्ते
जीवन की राह में घुलमिल जाते मधुर रिश्ते

अनवरत प्रयास से पुष्प पल्लवित हो जाते रिश्ते
फिर क्यूँ जख़्म सी पीड़ा दे जाते हैं जीवन में रिश्ते
https://ae-pal.com/
अति अनुराग में विपुल वेदना दे जाते हैं रिश्ते
सर्वस्व न्यौछावर से भी उपेक्षित रह जाते रिश्ते

आजीवन नहीं जी पाते,स्वार्थ से जुड़े स्वार्थी रिश्ते
जीवन की डगर में जुड़ जाते हैं ऐसे अनेकों रिश्ते
https://ae-pal.com/
नाटकीय प्रेम, स्वार्थ से मुरझा जाते हैं रिश्ते
धीरे धीरे फिर कहीं दम तोड़ जाते हैं मधुर रिश्ते

महत्ता जान कर,त्रुटि मान लेते हैं जो रिश्ते
प्रायः पुनर्जन्म ले पुनः अंकुरित,हो जाते हैं रिश्ते

Women’s day



हे नारी ,आश्रितों सा जीवन त्यागो
जागो,उठो,आलम्बन को गले लगाओ
पतझड़ से वीराने,शुष्क जीवन में,
अर्थ,लाभ के पुष्पों सा बसंत महकाओ

पढ़ लिख कर,घर खूब संवारा तुमने,
अब सुन्दर समाज संवार,सजाओं
उठो! हे परिवार की सुघड़ नारी,
सब को स्व-आलम्बन का अर्थ बताओ
https://ae-pal.com/
परिवार को,संस्कारों की,पोथी पढ़ा
सत्य से भरा,उन्नति पथ दिखाया है
जागो!हे परिवार की योग्य नारी,
अब अर्थ का मार्ग भी दिख लाओ

सुघड़,संस्कारी,योग्य हर गुण तुम में
अब शर्म में ,न समय तुम गवांओ
उठो! हे भारत की सबल, कर्मठ नारी,
अब यह सदी तुम अपने नाम करो

Blog at WordPress.com.

Up ↑