एक आईना ऐसा भी रख अपने पास में
जिसमें जैसा है अपना वज़ूद ,वैसा दिखना चाहिए
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कोने तो रोज ही दरकते रहते हैं आईने के
बस रिश्ता,आईने में, पहला से दिखना चाहिए.
अपर्णा शर्मा
April23rd,24
काँच से रिश्ते
प्रेम से खूब सँवारे थे
ख़यालों से सहेजे थे
सब ने पोषित किए
मोहब्बत के रिश्ते थे.
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प्रेम के बीज़ बो कर
लता सा मिला आकार
इक दूजे के गलबहियां
बीत रहा समय संसार.
क्षण के सोच का असर
छा गया फिर इस कदर
छन से टूट गया रिश्ता
बिखरा काँच सा इधर-उधर.
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रिश्ता रुसवा हो गया
काँच दिल में चुभता गया
समय पर न सचेतना
रिश्ते को दाग दे गया.
अपर्णा शर्मा
April 19th,24
एकाकीपन
अपना सब कुछ सहर्ष लुटा कर,संतानो को हर हाल में जिता कर
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अपने समूचे वज़ूद को खोकर,निनिर्मेष से हैं,अपने घर में पराए होकर.
अपर्णा शर्मा April16th, 24
