अंदेशे का शिकार होती हैं ख़ामोशियां
एक तरफा शिकायत होती है ख़ामोशियां।
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कहते हैं आते तूफ़ाँ की पहचान होती है ये
बड़े ज़ख्मों के लिए तैयार करती हैं ख़ामोशियां।
अपर्णा शर्मा
July 2nd,24
गुलमोहर
उदास दिल को मनाने
मधुर पल को संजोने
करते हो जब तुम आलिंगन
ऐ गुलमोहर! कैसे हो बहलाते ?
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प्रतिवर्ष स्वर्ण सा खरा तपकर
कुंदन सा तुम पोर-पोर खिलकर
शीतलता भी तुमसे मिले प्रेम तपिश में
ऐ गुलमोहर! कैसे चमकते हो चुप रह कर?
जब भी तुम्हारी छत्रछाया में होती खड़ी
बुन जाती है,प्रेम की अमिट मंजुल लड़ी
तुम भी बारिश से पत्रों में बरस बरस कर
ऐ गुलमोहर! कैसे बनाते हो यादो की सुनहरी घड़ी?
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शीत से हिम हुए सुप्त प्रेम को
तुम्हीं बढ़ा जाते हो प्रेम ताप को
पुष्पपत्र झरते मानो प्रेम पत्रों के शब्द बिखर गए
ऐ गुलमोहर !कैसे समेटते हो हर लम्हे को ?
और मैं अपने वज़ूद में कहीं ढूँढती हूँ गुलमोहर को?
स्वरचित:
अपर्णा शर्मा June 28th,24
धुएँ के राज
गंध और सुगंध धुएँ का कारण बता देते हैं
गलती हुई या हवन सब राज खोल देते हैं।
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काश अंतर्मन में उठे धुएं को कोई पहचान लेता
जान ले कोई,कि कितनी आग में मन जले होते हैं।
अपर्णा शर्मा
June25th,24
