सोच

दूर जाता हर शख्स सोचता रहा चला जाऊँगा बहुत दूर कि दुनिया बहुत बड़ी है।
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मिलने को आतुर वो नादां कहता रहा मिलेंगे ज़रुर कि दुनिया बहुत छोटी सी है।
अपर्णा शर्मा
June30th,2026

प्रेम ऐसा भी

वो सफर पर अकेला था
वो वहीं पर अकेली खड़ी
बस यह वज़ह रही जीने की
वो थी प्रेम की सुनहरी लड़ी.
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वक़्त के बीतते-बीतते
दोनों बढ़ चले अपने रास्ते
पर आज भी वज़ह है वहीं
दोनों के प्रेम की सुनहरी लड़ी.
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न मिलने की अभिलाषा
न विरह  का  कराहना
मौन जीवन में वज़ह वहीं
दोनों के प्रेम की सुनहरी लड़ी.
अपर्णा शर्मा
June 26th,2026

दो पंक्ति

नफा, नुकसान से अलहदा
धीमे से दस्तक दे गई वफ़ा।
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हो गई , बस अब हो ही गई
अब इसका क्या फलसफा।
अपर्णा शर्मा
June 23rd,2026

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